अपनी किताब बेचने के लिए विवाद की जरूरत नहीं सचिन को: सानिया

अपनी किताब बेचने के लिए विवाद की जरूरत नहीं सचिन को: सानिया

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मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर की आत्मकथा में विवादित मुद्दों के उल्लेख की चर्चा सभी जगह है। सितारा टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के अनुसार सचिन इतने बड़े क्रिकेटर हैं कि उन्हें किताब बेचने के लिए विवादों का सहारा लेने की जरूरत नहीं हैं।सानिया मिर्जा ने कहा कि सचिन के व्यवहार और व्यक्तित्व के बारे में सभी जानते हैं। खिलाड़ी के जीवन में जो हुआ उसे जानने की इच्छा सभी की होती है, कई बातें मीडिया में भी आती हैं। मगर खुद खिलाड़ी के द्वारा उन घटनाओं को जानने की उत्सुकता बनी रहती है। सचिन ऐसे व्यक्ति नहीं हैं कि अपनी आत्मकथा बेचने के लिए विवादों का सहारा लें। उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपने जीवन के घटनाओं का उल्लेख किया होगा। सानिया का करियर भी सफलताओं के साथ विवादों से भरा रहा है और जल्द वे भी अपनी आत्मकथा लेकर प्रशंसकों के बीच आने वाली हैं। इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मेरी आत्मकथा का बहुत सा हिस्सा लिखा जा चुका है और इसका संपादन चल रहा है। खिलाड़ियों के जीवन में इतनी घटनाएं होती हैं कि जितना लिखा होता है उसमें काफी कुछ और जोड़ने की जरूरत आ जाती है। अभी तक मेरी आत्मकथा के 25–26 अध्याय लिखे जा चुके हैं।

दिल की सुनती हूं                                                                                                                                                                             सानिया ने एशियाई खेलों में खेलने से पहले इंकार किया था और अचानक अगले ही दिन उन्होंने हामी भर दी थी। अचानक इस बदलाव के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं पूरी रात ठीक से सो नहीं सकी। मेरे लिए देश हमेशा पहले रहा है। एशियाड में खेलने से मुझे कई महत्वपूर्ण रैंकिंग टूर्नामेंट छोड़ना पड़े, लेकिन देश मेरी प्राथमिकता है। इसलिए मैंने सुबह उठकर फैसला किया कि मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लूंगी और देश के लिए जब पदक जीते तो मेरी खुशी दोगुनी हो गई।

मैंने 9 साल किया इंतजार                                                                                                                                                                 देश में दूसरी सानिया तैयार नहीं होने के विषय में उन्होंने कहा कि सफलता के लिए मेहनत करना और धैर्य रखना होता है। मैंने 6 साल की उम्र से खेलना शुर किया था और पहला टूर्नामेंट 15 साल की उम्र में जीता। 9 साल तक मैंने हिम्मत नहीं हारी। आजकल लोग बच्चों को टेनिस सीखने भेजते हैं और 1–2 साल में सफलता नहीं मिलती तो बंद करा देते हैं। यह सोच बदलना होगी। टेनिस में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है और ज्यादा मेहनत करना होती है।

 

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