शहाबुद्दीन ट्रेन से दिल्ली रवाना, जाएंगे तिहाड़ जेल

शहाबुद्दीन ट्रेन से दिल्ली रवाना, जाएंगे तिहाड़ जेल

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता #मोहम्मद_शहाबुद्दीन को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बिहार की सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजे जाने को लेकर शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटना से दिल्ली ले जाया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शाम को पटना के बेउर जेल से वाहनों के काफिले के बीच सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध के साथ शहाबुद्दीन को राजेंद्र नगर टर्मिनल ले जाया गया, जहां से संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना किया गया।

शहाबुद्दीन को एक्सप्रेस के जिस बोगी में बैठाया गया है, उसमें किसी भी यात्री को प्रवेश नहीं करने दिया गया, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जिस बोगी में शहाबुद्दीन को बैठाया गया है, उसमें सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।

इसके पूर्व शहाबुद्दीन को शुक्रवार देर रात सीवान जेल से निकाला गया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर शहाबुद्दीन को शुक्रवार रात लगभग 2.25 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सीवान जेल से पटना भेजा गया। शहाबुद्दीन को पटना लाने के लिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।

शनिवार सुबह पटना पहुंचने के बाद शहाबुद्दीन को पटना के बेउर जेल में रखा गया।

उल्लेखनीय है कि सीवान के चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू और आशा रंजन ने राजद नेता को सीवान जेल से स्थानांतरित किए जाने की याचिकाएं दायर की थी। याचिका पर फैसला सुनाते हुए बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को एक सप्ताह के भीतर सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया था। याचिका में कहा गया था कि शहाबुद्दीन के सीवान जेल में रहने से गवाहों को जान का खतरा है।

शहाबुद्दीन पर चंद्रकेश्वर प्रसाद के तीन बेटों और आशा के पति पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या का आरोप है।

याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि शहाबुद्दीन के खिलाफ लंबित मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई के लिए उन्हें सीवान जेल से राज्य के बाहर किसी अन्य जेल में स्थानांतरित कर दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि बिहार में चर्चित तेजाब हत्याकांड में दो भाइयों की हत्या मामले के चश्मदीद गवाह राजीव रोशन की हत्या मामले में पटना उच्च न्याालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन भागलपुर जेल से रिहा हुए थे, परंतु 20 दिनों के बाद ही सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद शहाबुद्दीन ने पिछले वर्ष 30 सितंबर को अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

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