गंगा की दशा पर भावुक हुए नीतीश, कहा- गंगा का हाल देखकर रोना आता है

गंगा की दशा पर भावुक हुए नीतीश, कहा- गंगा का हाल देखकर रोना आता है

बिहार के मुख्यमंत्री #नीतीश_कुमार ने कहा कि आज #गंगा का हाल देखकर रोना आता है। नदी के तल में जमा गाद पानी के प्रवाह में अवरोध पैदा करता है। गंगा की अविरलता सुनिश्चित किए बिना इसकी निर्मलता संभव नहीं है। यहां के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘गंगा की अविरलता में बाधक गाद : समस्या एवं समाधान’ विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का नीतीश ने उद्घाटन किया।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में उपस्थित पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों और गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा, “गाद से जटिल समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों पर भी पड़ता है।”

सम्मेलन का आयोजन बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा किया गया है।

नीतीश ने कहा, “आज गंगा नदी की स्थिति देखकर रोना आता है। नदी के तल में जमा गाद पानी के प्रवाह में अवरोध पैदा करता है। गंगा की अविरलता मेरे लिए कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं है। यह बिहार के स्वार्थ से जुड़ा मुद्दा भी नहीं है। यह राष्ट्र से जुड़ा मुद्दा है। यह प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है। गंगा की अविरलता को कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा।”

मुख्यमंत्री ने इस सम्मेलन एवं विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा, “इसका आयोजन 25-26 फरवरी को पटना में गंगा की अविरलता विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आए विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों के निष्कर्ष के बाद आगे की कार्रवाई के लिए रूपरेखा तय करने के लिए किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पर्यावरणविद् एवं नदी के विशेषज्ञ गाद से उत्पन्न जटिल समस्याओं के समाधान के तरीको को ढूढ़ेंगे, ताकि नदी अविरलता के लिए कार्यक्रम तय किया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “अपने बचपन के दिनों में मैं गंगा नदी से पानी भरकर लाया करता था। उस समय गंगा का जल काफी स्वच्छ था। आज स्थिति बदल गई है। गंगा का प्रवाह मार्ग गाद से पट गया है। फरक्का बराज के बनने के बाद इसके उध्र्व भाग में निरंतर गाद सालों साल जमा होता रहा है, जिसके कारण बाढ़ का पानी बक्सर, पटना तथा भागलपुर तक काफी दिनों तक रुका रहता है। यह बाढ़ बिहार में जलजमाव एवं काफी तबाही मचाता है, जिससे राज्य को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रत्येक साल काफी नुकसान होता है। 2016 में बिहार में आई बाढ़ की विभीषिका इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।”

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य को पांच सालों में कटाव-निरोधक कार्यो पर 1058 करोड़ रुपया खर्च करना पड़ा है। गंगा नदी की निर्मलता एवं डॉल्फिन में सीधा संबंध है। केंद्र सरकार को गाद प्रबंधन के लिए एक अच्छी नीति बनानी चाहिए।

नीतीश ने कहा, “गाद प्रबंधन नीति को व्यावहारिक रूप से सभी समस्याओं के अध्ययन एवं क्षेत्र भ्रमण के बाद तैयार करना अच्छा होगा। चितले कमिटी ने भी गाद को रास्ता देने की बात कही है। यही बात हम लगातार कहते आ रहे हैं। गंगा के अविरल प्रवाह को सुनिश्चित करना जनहित एवं राष्ट्रहित में है।”

बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा, “गंगा नदी में गाद की समस्या राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनना चाहिए। गाद की समस्या को आज बिहार झेल रहा है, कल उत्तर-प्रदेश, उत्तराखंड एवं अन्य राज्य भी झेल सकते हैं। गंगा नदी की अविरलता ही निर्मलता को बनाए रख सकती है।”

सम्मेलन को सांसद जयराम रमेश, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा, स्वामी अविमुक्ते श्वरानंद, प्रो. जी.डी. अग्रवाल, सांसद हरिवंश, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, एस.एन. सुब्बाराव सहित अन्य ने संबोधित किया।

पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार को नदी की अविरल धारा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

स्वामी अविमुक्ते श्वरानंद कहा, “गंगा भारत की प्रतीक है। इसका प्रवाह इसकी प्राण है।”

प्रो. जी.डी. अग्रवाल ने कहा, “गंगा की अविरलता मेरी मां के स्वास्थ्य का प्रश्न है।”

सांसद एवं प्रख्यात पत्रकार हरिवंश ने कहा, “इतिहास, संस्कृति, दर्शन सब कुछ हमने नदियों से सिखा। विकास के वैकल्पिक मॉडल लाने की जरूरत है।”

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंगा की अविरलता के सवाल को बहुत मनोयोग से उठाया है। नीतीश जी द्वारा बिहार में की गई शराबबंदी गांधीजी को सम्मान है। गांधीजी एवं गंगा का बहुत गहरा रिश्ता है। अविरलता नदियों का अधिकार है।”

अंत में नीतीश ने कहा, “यह सम्मेलन काफी कारगर होगा। हमें कामयाबी मिलेगी। सम्मेलन का नतीजा राष्ट्रहित में होगा।”

आगंतुकों को गंगा नदी के सामाजिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर एक फिल्म भी दिखाई गई।

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