आम बजट 2017-18 में बिहार के किसानों को लॉली पॉप

आम बजट 2017-18 में बिहार के किसानों को लॉली पॉप

केंद्रीय वित्त मंत्री #अरुण_जेटली ने बुधवार को लोकसभा में 2017-18 का आम बजट पेश किया। इस आम बजट को बिहार के किसान समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनके लिए केंद्रीय आम बजट में खास क्या मिला।

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले कृषि के लिए 3094 करोड़ के पैकेज की बात कही गई थी, लेकिन बजट में इस पैकेज पर कोई बात नहीं हुई। कृषि यांत्रिकीकरण के लिए पैकेज में 600 करोड़ की राशि का प्रावधान है, लेकिन हकीकत है कि 2016-17 में कृषि यांत्रिकीकरण का पूरे देश में ही 149 करोड़ का बजट था, जिसमें 7 करोड़ बिहार के लिए आवंटन है। इस प्रकार देखा जाए तो 600 करोड़ की राशि तो 60 साल में भी नहीं मिल पाएगा।

डेयरी, पशुपालन, मत्स्यपालन पर जोर देने की बात आम बजट में तो कही गई है। लेकिन बिहार के किसानों को इसमें अलग से कितना लाभ दिलाया जाएगा। ऐसा अलग से कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है। एक अच्छी बात है कि फसल बीमा 40 प्रतिशत तक करने की बात कही गई है। जो पहले अधिकतम 30 प्रतिशत ही थी। यह बिहार के हित में हो सकता है।

बिहार में बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति हमेशा बनी रहती है। ऐसे में फसल बीमा का बेहतर प्रावधान किसानों के हित में हो सकता है। किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही जा रही है। लेकिन दोगुनी आय कैसे होगी, इसका कोई ठोस रोड मैप नहीं दिख रहा।

देश भर के किसानों को 10 लाख करोड़ ऋण दिलाने की बात की गई है। लेकिन बिहार में बैंकों का किसानों के प्रति जो रवैया रहा है, उससे उम्मीदें पूरी होने पर पहले ही प्रश्नचिह्न लग जा रहा है। सिंचाई योजना के लिए 5 हजार करोड़ की राशि की बात है। इसमें बिहार को लगभग 200 करोड़ रुपए मिल सकता है। इस राशि से जिलों में सिचाई योजनाएं जो प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के एकीकृत की जा रही है। कुछ सिंचाई का प्रबंध हो सकता है।

हालांकि इस योजना में अलग से कुछ नहीं है। सिंचाई की सभी पुरानी योजनाओं को एक किया जा रहा है। एरिया और जमीन के हिसाब से जिलों को आवश्यकतानुसार सिंचाई प्लान बनाने के लिए कहा गया है। अभी तक बिहार के सभी जिलों में सिंचाई योजनाएं पूरी नहीं हुई है।

मधु उत्पादक युवा किसान रमेश रंजन का कहना है कि बजट में किसानों के फसल बिक्री की गारंटी की व्यवस्था नहीं है। मधु उत्पादक किसानों को मेहनत के हिसाब से कीमत नहीं मिलती है, जबकि उसी मधु को कंपनियां अधिक कीमत पर बेचती है।

मुजफ्फरपुर के प्रगतिशील किसान दिनेश कुमार का मानना है कि सामान्य फसल धान व गेहूं के साथ ही सब्जी आदि के उत्पादक किसानों के लिए बजट में खास नहीं है। किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या फसल बेचने की है।

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