पैरों से बच्चों को खाना खिलाती है लक्ष्मी, इसे कहते हैं जज्बा

पैरों से बच्चों को खाना खिलाती है लक्ष्मी, इसे कहते हैं जज्बा

ये हैं लक्ष्मी कुमारी। उम्र 35 वर्ष। लेकिन, जन्म से ही दिव्यांग हैं। दोनों हाथ पूरी तरह से विकसित नहीं हुए। वे अपने सारे काम पैरों से ही करती हैं। सही मायने में लक्ष्मी अपने पैरों पर खड़ी हैं। इसी पैर से कपड़े पहनती हैं, खाना खाती हैं, बच्चों को खिलाती हैं, यहां तक कि अस्पताल में दवाइयां काटकर मरीजों को देती हैं।

सूई में धागा डालने जैसा कठिन काम भी पैरों से ही करती हैं। जबकि इसे लोग हाथों से भी एक बार में नहीं कर पाते। इन्हें कभी दो हाथों की कमी महसूस नहीं हुई। इनके पैरों ने इन्हें अपने मुकाम तक पहुंचने में मदद की। घर में तीन भाई और तीन बहनें हैं। सबकी शादी हो चुकी है।

स्कूल में एडमिशन नहीं हो रहा था, पैरों से लिख कर दिखाया तो मिला

लक्ष्मी बताती हैं कि उन्हें बेड़ो के टुको स्थित संत मैरी बालिका विद्यालय में एडमिशन नहीं मिल रहा था। टीचर्स कह रहे थे कि बिना हाथ के कैसे पढ़ेगी? लिखोगी कैसे? पैरों से ही लिखकर दिखाया, तब जाकर दाखिला मिला। अब लक्ष्मी दर्शनशास्त्र से ग्रेजुएट हैं। नगड़ी के एक स्कूल में दो साल तक पढ़ाया भी। बाद में गुरुनानक होम फॉर हैंडिकैप्ड चिल्ड्रन में नौकरी मिल गई। यहां वे रिसेप्शनिस्ट हैं।

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