इन सभी नवरात्रों में चैत्र नवरात्र का है बहुत महत्व

इन सभी नवरात्रों में चैत्र नवरात्र का है बहुत महत्व

देवी भागवत पुराण के अनुसार पूरे वर्ष में चार #नवरात्र होते हैं। दो गुप्त, तीसरे शारदीय और चौथे #चैत्र_नवरात्र। अमूमन लोग #गुप्त_नवरात्र के बारे में कम ही जानते हैं। साल में दो बार होने वाले शारदीय और चैत्र नवरात्र के बारे में ज्यादातर लोगों की जानकारी होती है।

चारों नवरात्र का मकसद और मान्यताएं अलग-अलग हैं। पुराणों में चैत्र नवरात्र को आत्मशुद्धि और मुक्ति का आधार माना गया है। वहीं शारदीय नवरात्र को वैभव और भोग प्रदान करने वाला माना गया है।

गुप्त नवरात्र को तंत्र क्रिया से जुड़े हुए लोग ज्यादा मानते हैं। इस दौरान तांत्रिक और अन्य धर्म-कर्म से जुड़े लोग टोने-टोटके करते हैं। इस दौरान किए हुए टोने-टोटके असरकारक भी होते हैं।

इस बार चैत्र नवरात्र 28 मार्च से शुरू हुई और 5 मार्च को संपन्न होंगे। चैत्र नवरात्र में घर में पूजन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दौरान पूजा करने वाले साधक को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए।

चैत्र नवरात्र यानी इन नौ दिन में जातक उपवास रखकर अपनी भौतिक, शारीरिक, आध्यात्मिक और तांत्रिक इच्छाओं को पूरा करने की कामना करता है। इन दिनों में ईश्वरीय शक्ति उपासक के साथ होती है और उसकी इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाले चैत्र नवरात्र में सूर्य का राशि परिवर्तन होता है। सूर्य इस दौरान मेष में प्रवेश करता है। चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने का असर सभी राशियों पर पड़ता है।

ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के नौ दिन काफी शुभ होते हैं, इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य बिना सोच-विचार के कर लेना चाहिए। इसका कारण यह है कि पूरी सृष्टि को अपनी माया से ढ़कने वाली आदिशक्ति इस समय पृथ्वी पर होती है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। तीसरे चैत्र नवरात्र को भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लेकर पृथ्वी की स्थापना की थी। इसके बाद भगवान विष्णु का भगवान राम के रूप में अवतार भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था। इसलिए इनका बहुत अधिक महत्व है।

चैत्र नवरात्र हवन पूजन और स्वास्थ्य के बहुत फायदेमंद होते हैं। इस समय चारों नवरात्र ऋतुओं के संधिकाल में होते हैं यानी इस समय मौसम में परिवर्तन होता है। इस कारण व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करता है। मन को पहले की तरह दुरुस्त करने के लिए व्रत किए जाते हैं।

नवरात्रि पूजन विधि: नवरात्रि के दिन सुबह ब्रहम मुहूर्त में उठकर शुद्घ जल से स्नान करें। इसके बाद घर के किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिटटी से वेदी बनाएं। वेदी में जौ आैर गेहूं दोनों को मिलाकर बोए। वेदी के पास धरती मां का पूजन कर वहां कलश स्थापित करें। जिसके बाद सबसे पहले प्रथमपूज्य श्रीगणेश की पूजा करें। इसके बाद वेदी के किनारे पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी मां की प्रतिमा स्थापित करें। मां दुर्गा की कुंकुंम, चावल, पुष्प, इत्र इत्यादि से विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

इन बातों का रखें विशेष ध्यानः 

♦ नवरात्रि में मिटटी, पीतल, तांबा, चांदी या सोने का ही कलश स्थापित करें, लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग बिल्कुल ना करें।

♦ नवरात्रा के दौरान ब्रहमचर्य का पालन करना चाहिए।

♦ व्रत करने वाले भक्त को जमीन पर सोना चाहिए आैर केवल फलाहार करें।

♦ नवरात्रि में क्रोध, मोह, लोभ जैसे दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।

♦ अगर सूतक हो तो घट स्थापना ना करें आैर यदि नवरात्रा के बीच में सूतक हो जाए तो कोर्इ दोष नहीं होता।

♦ नवरात्रि का व्रत करने वाले भक्तों को कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए।

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