सीएस ने मांगा स्पष्टीकरण, पीएचसी प्रभारी ने पद छोडऩे की पेशकश कर दी

सीएस ने मांगा स्पष्टीकरण, पीएचसी प्रभारी ने पद छोडऩे की पेशकश कर दी

धनबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिव्यांग लिपिक राजीव कुमार के योगदान को लेकर घमासान मच गया है। लिपिक का योगदान नहीं कराने पर जहां सिविल सर्जन डॉ. चंद्राम्बिका श्रीवास्तव ने धनबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. आलोक विश्वकर्मा से स्पष्टीकरण मांगते हुए उन्हें लिपिक का तत्काल योगदान कराने का निर्देश दिया तो जवाब में डॉ. विश्वकर्मा ने प्रभारी का पद ही छोडऩे की पेशकश कर दी।

उन्होंने इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. चंद्राम्बिका श्रीवास्तव को पत्र दे दिया है जिसमें पीएचसी प्रभारी समेत तमाम प्रशासनिक दायित्व से मुक्त करने का आग्रह किया गया है। बता दें कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग में 43 लिपिकों का तबादला किया गया है। काफी सारे लिपिकों ने नए स्थान पर योगदान दे दिया है पर कई अब भी पुराने स्थान पर बने हुए हैं। धनबाद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नए लिपिक का पदभार नहीं हुआ है।

नए बदलकर आए लिपिक राजीव कुमार तत्काल उस पद पर योगदान देना चाहते हैं पर उन्हें दायित्व सौंपा नहीं जा रहा है। मामले की जानकारी पाकर सिविल सर्जन डॉ. चंद्राम्बिका श्रीवास्तव ने नए लिपिक को तत्काल दायित्व सौंपने का आदेश प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आलोक विश्वकर्मा को दिया था पर वे प्रभार नहीं दिला सके। इस पर उन्हें सिविल सर्जन ने शोकॉज करते हुए तत्काल नए लिपिक को योगदान कराने का निर्देश दिया था।

इसके लिए उन्हें बुधवार तक का समय दिया गया था लेकिन बुधवार को डॉ. विश्वकर्मा ने प्रभारी का पद छोडऩे की पेशकश कर दी। अब उनकी पेशकश पर सिविल सर्जन को निर्णय लेना है। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि वे कार्य बोझ के कारण प्रभारी का दायित्व नहीं संभाल पा रहे थे इसलिए उन्होंने पद छोडऩे की पेशकश की है। इसमें लिपिकों के तबादला का कोई मसला नहीं है।

तबादला के बावजूद कई बाबुओं की नहीं हिल रही कुर्सी

स्वास्थ्य विभाग में पांच वर्ष से एक ही स्थान पर जमें करीब 43 स्वास्थ्यकर्मियों का तबादला तो कर दिया गया पर इसमें कई ऐसे हैं जिनकी कुर्सी इसके बावजूद नहीं हिली। तबादला आदेश को दो माह बीतने के बाद भी कई बाबू पुरानी जगह पर ही बरकरार है। कुछ नए लिपिकों को चार्ज नहीं सौंप रहे हैं तो कुछ नए जगह पर जाकर प्रभार ही नहीं ले रहे हैं। विभाग में ऐसे करीब एक दर्जन बाबू हैं जो तबादला आदेश के बावजूद मजे से पुराने स्थान पर ही काम कर रहे हैं।

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