आखिर केजरीवाल से कांग्रेस की दूरी कब तक बनी रहेगी?

आखिर केजरीवाल से कांग्रेस की दूरी कब तक बनी रहेगी?

#ममता_बनर्जी कितना भी प्रयास कर लें, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की करीबी नहीं होने वाली है। अपने दिल्ली दौरे में ममता ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलीं। अपनी पिछली दिल्ली यात्रा में भी वे #केजरीवाल से मिली थीं और पिछले साल नोटबंदी के समय तो उन्होंने केजरीवालव के साथ दिल्ली में एक रैली को भी संबोधित किया था।

सो, कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद जब वे केजरीवाल से मिलीं तो उन्होंने उनका कांग्रेस विरोध कम करने के लिए समझाया। बताया जा रहा है कि उन्होंने केजरीवाल से कहा कि सबका साझा दुश्मन भाजपा है। बाद में ममता ने मीडिया से भी कहा कि केजरीवाल को कांग्रेस की बजाय भाजपा से लड़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। लेकिन ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस नेताओं को यह सुझाव रास नहीं आया है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने दो टूक अंदाज में इस विचार को खारिज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के एक करीबी नेता ने कहा कि कांग्रेस और आप एक साथ नहीं आ सकते हैं। उनका कहना है कि 2013 के चुनाव के बाद कांग्रेस ने आठ विधायकों का समर्थन देकर केजरीवाल की सरकार बनाई थी, लेकिन उसके बाद 2015 के चुनाव में कांग्रेस जीरो पर आ गई। इसलिए फिर आप के साथ जाने की गलती कांग्रेस नहीं करेगी।

आम आदमी पार्टी के नेताओं में हालांकि कांग्रेस के प्रति इतना विरोध नहीं है। उनको लग रहा है कि किसी एक राष्ट्रीय पार्टी के साथ होने से फायदा होगा। सो, वे कांग्रेस विरोध कम करने को तैयार हैं। लेकिन कांग्रेस उन्हें अपने लिए खतरा मान रही है। यह भी कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी को खुद चूंकि भाजपा के खिलाफ लड़ना है और उनके प्रदेश में भाजपा की ताकत बढ़ रही है इसलिए वे भाजपा को दुश्मन नंबर एक बता कर सभी पार्टियों को एकजुट कर रही हैं।

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