नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत 821 साल बाद फिर से जीवंत

नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत 821 साल बाद फिर से जीवंत
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प्राचीन भारत में ज्ञान का केंद्र रहे नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत 821 साल बाद फिर से जीवंत हो गयी. सोमवार से अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय (एनयू) में पढ़ाई शुरू हुई. फिलहाल दो विषयों की पढ़ाई शुरू की गयी है. इसके लिए 35 देशों के 1400 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें 15 का चयन हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय (एनयू) में दो विषयों की पढ़ाई के साथ ही इसकी यात्र शुरू हो गयी. राजगीर की पहाड़ियों, गरम कुंड के झरनों और पांडव पोखर के ठीक बगल में बना भव्य कॉन्वेंशनल हॉल इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना. जापान, भूटान, आंध्रप्रदेश, कोलकाता, पटना, फरीदाबाद और रांची के दस छात्रों और ग्यारह फैकल्टी मेंबर के साथ यह यात्र शुरू हुई. एनयू में 15 छात्रों का दाखिल हुआ है. हिस्टोरिकल स्टडीज और इनवायरमेंट एंड इकोलॉजिकल स्टडीज की पढ़ाई सोमवार से शुरू हुई. यहां कुल सात विषयों की पढ़ाई होगी. यह देश में अपने तरह का अनोखा विश्वविद्यालय होगा. एनयू के पहले दिन का माहौल किसी सपने के सच होने जैसा था. वाइस चांसलर, डीन और फैकल्टी मेंबर के साथ छात्रों के चेहरे पर चमक थी. वाइस चांसलर गोपा सभरवाल का कहना था : बीते चार साल से हमने जो सपना देखा था, आज वह पूरा हुआ. अब हमारी दूसरी यात्र शुरू हुई. डीन अंजना शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के पहले चरण का काम सुखद हिंदी फिल्मों की तरह पूरा हुआ.
 वाइस चासंलर, फैकल्टी और छात्रों के साथ कॉन्वेंशनल हॉल में प्रेस कान्फ्रेंस का आयोजन किया गया. वाइस चांसलर और डीन ने कहा कि एनयू की ऐतिहासिक शुरुआत हो गयी. इस विश्वविद्यालय के स्थापना को लेकर न जाने कितनी बाधाएं आयीं. तूफान आये. तरह-तरह की बातें की गयीं. पर हम जद्दोजहद करते रहे. आखिरकार नालंदा जीत गया. नालंदा कभी हार नहीं सकता.
1400 छात्रों के आये आवेदन : वाइस चांसलर के मुताबिक, 35 देशों के कुल 1400 छात्रों के आवेदन मिले थे. लेकिन विश्वविद्यालय ने छात्रों के चयन का जो मानक तैयार किया है, उसके अनुसार ही हमें छात्रों को लेना था. चयनित विद्यार्थियों में चार लड़कियां हैं. उन्होंने साफ किया कि एनयू की स्थापना सिर्फ पढ़ाने और डिग्री देने के लिए नहीं है. इसका मूल काम रिसर्च आधारित है. हम मानते हैं कि दुनिया में अलग-अलग क्षेत्रों में जो उम्दा रिसर्च हो रहे हैं, उसमें आनेवाले दिनों में हमारी पहचान बनेगी. इस आधार पर छात्रों के नंबर को हमने आधार नहीं बनाया. हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में नालंदा मिसाल बनेगा. वाइस चांसलर ने कहा कि जिन छात्रों का चयन किया गया है, वे अपने विषयों में असाधारण प्रतिभा रखते हैं. छात्रों का चुनाव कठोर मानक के आधार पर किया गया है.
प्राचीन नालंदा से आधुनिक समय तक : नये विश्वविद्यालय और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के बीच फासला 14 किलोमीटर है. पुराना विश्वविद्यालय खंडहर में तब्दील हो चुका है. पर इतिहास का चक्र देखिए कि उसकी कड़ियां जुड़ गयीं.
गोपा सभरवाल ने कहा कि प्राचीन नालंदा ज्ञान का केंद्र था. दर्शन, भाषा, धर्म और दूसरे विषयों की पढ़ाई होती थी. नया विश्वविद्यालय भी ज्ञान का केंद्र बनेगा. उनका कहना था : हम ऐसा मानते हैं कि पुराने नालंदा और नये नालंदा के बीच समय का फासला है. पर ध्येय एक जैसा ही है. हम इसे ऊंचाई पर ले जायेंगे. मालूम हो कि पुराने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पांचवी शताब्दी में गुप्त शासन के दौरान हुई थी और इस पर तीन बार आक्रमण हुए थे. तीसरा हमला बख्तियार खिजली ने 1193 में किया था. प्राचीन विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों की खोज इतिहासकार अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी.
फैकल्टी ने बांटे अपने अनुभव
यहां पढ़ाने आये फैकल्टी सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे अपने-अपने विषयों में अपनी मेधा व अपने अनुभवों को बांटना चाहते हैं. फैकल्टी मेंबर एम डे, सोमनाथ बंधोपाध्याय, के गनी, शैमुएल राइट, एस मुखर्जी और यिन केर ने कहा कि वे रिसर्च के काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं. सबने भरोसा जताया कि एनयू के जरिये बिहार और भारत का नाम रोशन होगा.
नीतीश ने किया फोन
जब क्लास चल रहा था, तभी वाइस चांसलर के फोन की घंटी बजी. आमतौर पर क्लास के दौरान फोन रिसीव नहीं किया जाता. पर वह फोन खास था. डीन ने कहा कि वह नीतीश कुमार का फोन था. उन्होंने आज से पढ़ाई शुरू होने पर सबको शुभकामनाएं दीं. कुमार काफी शिद्दत के साथ इस संस्थान की नींव रखने में लगे हुए थे.
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
मुख्यमंत्री ने सोमवार को नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवि में पढ़ाई शुरू होने पर कहा कि इसके लिए पूर्व सीएम नीतीश कुमार की जितनी भी प्रशंसा की जाये, वह कम है. करीब 800 साल बाद बिहार का गौरव फिर से लौट आया है. नीतीश कुमार ने इसे पुनर्जीवित किया है. बिहार व देश के लिए आज का दिन स्वर्णिम है. इस विश्वविद्यालय के फिर से स्थापना होने से शैक्षणिक क्षमता बढ़ेगी.
सपना हुआ पूरा
राजगीर में आयुध फैक्टरी, सैनिक स्कूल, सीआरपीएफ कैंप, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के बाद एनयू की गतिविधियां शुरू हो गयीं. इतिहास सेवर्तमान का साक्षात्कार रोमांच से भर देता है.
राजगीर में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं
राजगीर में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है. आरडीएच इंटर कॉलेज में 12 वीं तक पढ़ाई होती है. स्नातक की पढ़ाई के लिए छात्रों को बिहारशरीफ जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय तो खुल गया, पर डिग्री कॉलेज का होना जरूरी है.

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