100 करोड़ आधार नंबर जारी करने का लक्ष्य, बिहार, झारखंड

100 करोड़ आधार नंबर जारी करने का लक्ष्य, बिहार, झारखंड

11_09_2014-11aadharबिहार और झारखंड   के लोगों को अब ‘आधार’ बनवाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब इन राज्यों में भी दिल्ली की तरह जल्द से जल्द ‘आधार’ कार्ड बन जाएगा। दरअसल सरकार ने इन चारों राज्यों में ‘आधार’ बनाने का जिम्मा अब यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) को सौंप दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बुधवार को यह फैसला किया।

पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने इन राज्यों में आधार बनाने के लिए पंजीकरण का जिम्मा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया यानी जनगणना विभाग को दिया था। लेकिन, आरजीआइ की सुस्त रफ्तार के कारण इन राज्यों में आधार नंबर देने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका। इसीलिए मौजूदा सरकार ने यह काम यूआइडीएआइ को सौंपा है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई सीसीईए की बैठक में यूआइडी योजना के पांचवें चरण को मंजूरी देते हुए यूआइडीएआइ को 2015 तक तक कुल 100 करोड़ आधार नंबर जारी करने का लक्ष्य दिया है। इसमें 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रार के तहत नामांकन से जारी आधार नंबर भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि यूआइडी योजना 2009 में शुरू हुई थी। अगस्त 2010 में पहला आधार नंबर जारी हुआ। तब से लेकर अब तक कुल 67.38 करोड़ आधार नंबर जारी हो चुके हैं। आधार योजना पर 31 अगस्त 2014 तक 4906 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में यूआइडीएआइ जो आधार संपर्क केंद्र लगाएगी, उनकी जानकारी बाद में उपलब्ध होगी। दरअसल आधार नंबर के पंजीकरण को लेकर यूआइडीएआइ और गृह मंत्रलय के बीच पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में विवाद पैदा हुआ था। गृह मंत्रालय की मांग पर तत्कालीन सरकार ने उत्तर प्रदेश, बिहार सहित सीमावर्ती पर्वतीय राज्यों में पंजीकरण का कार्य आरजीआइ को सौंपा। लेकिन, आरजीआइ अब तक यह कार्य पूरा नहीं कर पाया।

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