सीएम ने की आईजी अरविन्‍द पांडेय की तारीफ

सीएम ने की आईजी अरविन्‍द पांडेय की तारीफ

श्री पांडेय की पुस्‍तक ‘सशक्तीकरण’ का विमोचन

पटना। मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को संवाद कक्ष में कमजोर वर्ग के आईजी अरविन्‍द पांडेय की पुस्‍तक ‘सशक्तीकरण’ का विमोचन किया। इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने श्री पांडेय की तारीफ करते हुए कहा कि ब्राहृमण् होते हुए भी श्री पांडेय ने अनुसूचित जाति—जनजाति के कल्‍याण के लिए जितना काम किया वह दूसरे अफसरों के लिए नजीर है। आईजी कमजोर वर्ग के पद पर एक अनुसूचित जाति का अधिकारी जितना काम करता उससे दस गुना ज्‍यादा काम श्री पांडेय कर रहे हैं। मुख्‍यमंत्री ने श्री पांडेय के संदर्भ में अपना संस्‍मरण भी सुनाया।  उन्‍होंने बताया कि जब वे गया के डीआईजी थे तो वे विधायक के रूप में एक काम लेकर उनके पास गए थे। उस समय श्री पांडेय ने उनका काम करने से इन्‍कार करते हुए कहा कि वे अभी नीतीश कुमार के नियमों का पालन करा रहे हैं। उस समय उनके मन में उनके प्रति नाराजगी हुई। लेकिन कमजोर वर्ग में उन्‍होंने जब उनके काम को देखा तो उनका मन श्रद्धा से भर गया। इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने एससी—एसटी के अत्‍याचार मामलों में नियम सम्‍मत कार्रवाई करने और उचित मुआवजा देने पर जोर दिया। श्री पांडेय ने कहा कि पुस्‍तक में कमजोर वर्ग,महिलाओं और बच्‍चों के अत्‍याचार, सुरक्षा और मुआवजा के प्रावधानों को सरल ढंग से बताया गया है। यह पुस्‍तक पुलिस अफसरों के बीच मुुफ्त में बंटेगी ताकि नियमों को समझकर उसे वे लागू करें। उन्‍होंने कहा कि अब मृतकों के आश्रितों को मुआवजा के रूप में सात लाख मिलेंगे। विमोचन समारोह में गृह सचिव अमीर सुबहानी, डीजीपी पीके ठाकुर, डीजी ट्रेनिंग पीएन राय, कल्‍याण सचिव अमरजीत सिन्‍हा, आईएएस हुकुम सिंह मीणा समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

कौन हैं अरविन्‍द पांडेय

अरविन्‍द पांडेय 1988 बैच के तेज—तर्रार, ईमानदार और जनोन्‍मुख कार्यशैली वाले आईपीएस अफसर माने जाते हैं। इनकी ट्रेनिंग रांची में हुई। फिर एएसपी के रूप में उनकी यहां पहली पोस्टिंग भी हुई। उस समय अपराध से कराह रहे रांची को उन्‍होंने अपराधमुक्‍त किया था। आज भी रांची के लोग उन्‍हें याद करते है। उसके बाद चतरा, पलामु, खगडिया, साहिबगंज, सहरसा  के एसपी के रूप श्री पांडेय ने अपने काम से खूब नाम कमाया। उनके नाम से अपराधी कांपते थे। इन जिलों में उन्‍होंने वार्ड और पंचायत स्‍तर पर ग्राम स्‍वराज समितियों का गठन किया था। जिनके अध्‍यक्ष अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों बनाया गया था। श्री पांडेय बेतिया, गया और मुजफ्फरपुर ,रेल डीआईजी और दरभंगा के आईजी भी रहे।

शक्तिपीठ विंध्‍याचल धाम के पुराहित परिवार से आने वाले श्री पांडेय जहां भी पदस्‍थापित रहे न केवल कमजोर वर्गों खासकर अनुसूचित जाति जनजाति के अत्‍याचार के मामलों में संवेदनशील रहे। बल्कि उनका हक दिलाने के लिए अभियान चलाया। साहिबगंज जिले के एसपी के रूप में पत्‍थर मशीनों और खादानों में काम करने वाले आदिवासी और मुसहर मजदूरों को न्‍यूनतम मजदूरी दिलाने के लिए किए गए उनके कामों की खूब सराहना हुई थी। आईजी कमजोर वर्ग के रूप में उनके काम की प्रशंसा भारत सरकार के एसटी—एससी आयोग ने भी की है।

श्री पांडेय पर महान अमेरिकन राजनीतिक चिंतक मार्टिन लूथर की एक पंक्ति सटीक बैठती है। लूथर ने कहा था यदि आप झाड़ूकश भी हैं तो झाड़ू ऐसे लगाएं, जैसे शेक्सपीयर कविता लिखते थे और मैकियावेली पेंटिंग बनाते थे। आपका काम ऐसा होना चाहिए कि उधर गुजरने वाला यह महसूस करे कि यहां कोई महान झाड़ूकश रहता है। श्री पांडेय ने पुलिस मुख्यालय में अत्यंत महत्वहीन रहे आईजी कमजोर वर्ग के पद को अपने काम से अत्यंत महत्व का बना दिया। श्री पांडेय के काम से ईष्र्र्र्या् रखने वाले शासन के शीर्ष पर बैठे कुछ नौक​रशाहों की साजिश से वे इसके पहले भी कई बार गैरमहत्वपूर्ण् पर बिठाए गए थे लेकिन अपने काम से उन पदों का महत्व बढाया। सीआईडी,बीएमपी,कंम्प्यूटर विभाग में उनके काम की चर्चा होती है।

श्री पांडेय इसके पहले एक किताब स्‍वप्‍न और यथार्थ लिख चुके हैं। जो कविता और निबंधों का संग्रह है। ब्राह्मणों सावधान और अक्षुण्‍ण रहेगा अम्‍ेबडकर का देवत्‍व जैसे उनके लेख भी चर्चा में रहे। श्री पांडेय का सबसे बडा परिचय यह है कि वे इस देश के चंद अफसरों में हैं, जिनका परिवार वेतन पर पलता है। इनकी पत्‍नी अरुणा पांडेय और दो बेटिया नंदिता और वंदिता हैं।

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One Response to "सीएम ने की आईजी अरविन्‍द पांडेय की तारीफ"

  1. Kumar   August 29, 2014 at 9:09 am

    very good and full of information

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