वनडे में धौनी ने बदल दी भारत की दशा और दिशा

वनडे में धौनी ने बदल दी भारत की दशा और दिशा

29 सितंबर, 2007 का दिन. इसी दिन महेंद्र सिंह धौनी ने वनडे क्रिकेट में पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभाली. सामने थी उस समय की वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की टीम. बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हुआ और नो रिजल्ट के रूप में समाप्त हुआ. हालांकि अगले सात सालों में समय की कसौटी पर एमएस धौनी का कप्तान बनना भारत के लिए बेहतरीन रिजल्ट देने वाला साबित हुआ. धौनी के कुशल नेतृत्व से भारत क्रिकेट के इस फॉर्मेट में प्रतिस्पर्द्धी टीम से आगे बढ़ कर वर्ल्ड बीटर और और वर्ल्ड चैंपियन बन कर सामने आयी.   एमएस धौनी के कप्तान बनने से पहले भारत की गिनती उन टीमों में होती है, जिसे जीत की तुलना में हार ज्यादा मिली थी (देखें संलग्न तालिका). लेकिन अगले सात सालों में स्थिति बिल्कुल बदल गयी. इस समय काल में भारत ने 199 वनडे मैच खेले और 117 में जीत दर्ज की. हार सिर्फ 67. इनमें से कुछ मैच धौनी ने नहीं खेले, लेकिन उनकी तैयार की हुई टीम ने उनमें से भी अधिकांश मैचों में जीत दर्ज की.   हर खिलाड़ी मैच विनर धौनी के कप्तान बनने से पहले भारत वनडे में जीत के लिए कुछ चुनिंदा खिलाडि़यों के अच्छे प्रदर्शन पर निर्भर रहता था. धौनी ने टीम की मानसिकता बदली. टीम का हर खिलाड़ी मैच विनर के रूप में सामने आया.    फील्डिंग पर विशेष जोर पहले भारत को फील्डिंग में सबसे कमजोर माना जाता था, लेकिन कप्तान धौनी ने फील्डिंग को प्राथमिकता पर रखा और इससे आज वनडे में भारतीय टीम दुनिया की बेहतरीन फील्डिंग यूनिट में से एक है.   लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट धौनी की अगुआई में भारत की वनडे में सफलता के पीछे बड़ा हाथ धौनी के अपने प्रदर्शन का भी है. उन्होंने बतौर कप्तान 162 मैच खेले और 58.55 के औसत से 5621 रन बनाये. इस दौरान भारत के लिए उनसे ज्यादा रन सिर्फ विराट कोहली (5667) ने बनाये हैं.   हर खिताब दिलाया टेस्ट क्रिकेट में भले ही बतौर कप्तान धौनी की क्षमता पर सवाल उठे, लेकिन वनडे में वह निर्विवाद रूप से भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान रहें हैं. उन्होंने भारत को वनडे वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप, ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय सीरीज आदि में जीत दिलायी.     mahendra-singh-dhoni_650_021713050754

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