एनडीए सरकार के 100 दिन पूरे

एनडीए सरकार के 100 दिन पूरे

यूपीए सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व में बनी एनडीए सरकार को काम करते हुए 3 सितंबर को 100 दिन पूरे हो रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान देश के विकास के लिए मोदी ने जनता से 60 साल के बदले 60 महीने मांगे थे। इसलिए मोदी के पीएम बनने के बाद उनकी सरकार के हर दिन के काम पर चर्चा लाजमी है। मोदी सरकार ने इस साल 26 मई को सत्ता संभालने के बाद अपने चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार काम करना शुरू भी कर दिया।

मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहले विदेशों में भारतीयों के जमा कालेधन को वापस लाने के लिए एसआईटी का गठन किया। लेकिन कालाधन कब देश में वापस आएगा यह स्पष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सभी गांवों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई का वादा किया है। सरकार बिजली संकट को खत्म करने के लिए ज्योति ग्राम योजना पर काम कर रही है।

सरकार ने 2022 तक सबको मकान मुहैया कराने का सपना दिखाया है। सरकार टाउन प्लानिंग में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करना चाहती है ताकि शहरों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सके। लेकिन इस मामले में अब तक शहरी विकास मंत्रालय की कुछ बैठकें हुई हैं।

भाजपा ने गांवों में सड़क, पीने का पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, ब्रॉडबैंड, नौकरी, बाजार से गांव को जोड़ने और सुरक्षा मुहैया कराने जैसे वादे किए थे। केंद्र की एनडीए सरकार ने अब तक के कार्यकाल में ग्रामीण इलाकों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे साफ-सफाई पर कुछ ध्यान दिया है। ज्यादातर अन्य मुद्दों पर अब तक न तो कोई ठोस नीति बनी है और न ही कोई बड़ा कदम उठाया गया है। देश के कई गांवों में अब भी बिजली नहीं पहुंची है। आबादी के लिए लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 10000 से ज्यादा गांवों में आज भी बिजली नहीं है।

सरकार 2 अक्टूबर से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ शुरू करने जा रही है। इसके तहत अगले एक साल में देश के सभी स्कूलों में शौचालय बनवाने और साफ-सफाई का लक्ष्य रखा गया है। इस मामले में कुछ प्राइवेट कंपनियां केंद्र की मदद के लिए आगे आई हैं। हालांकि, मोदी सरकार के पहले तीन महीनों में इस ओर कोई ठोस काम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।

मोदी सरकार चाहती है कि ऐसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का विकास किया जाए, जो निजी गाड़ियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित न करे। इस दिशा में देश के कुछ शहरों में मेट्रो का निर्माण किया जा रहा है। सरकार मेट्रो के विकास के लिए कुछ शहरों को फंड भी मुहैया करा रही है। दिल्ली में दो इंटीग्रेटेड पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब का भी निर्माण किए जाने की घोषणा की गई है। हालांकि, इस मामले में नतीजे देखने के लिए कुछ इंतजार करना पड़ेगा।

मोदी ने डिजिटल इंडिया कैंपेन को जोरशोर से शुरू किया है। इसके तहत सरकार भारत को विनिर्माण हब बनाना चाहती है। सरकार ने देश में तकनीक समानों का आयात कम करने के लिए देश में उत्पादन बढ़ाने का सपना दिखाया है। आईटी के जरिए देश के सभी ग्राम पंचायतों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश हो रही है। सरकार का यह भी मानना है कि डिजिटल इंडिया अभियान से नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा। डिजिटल इंडिया कैंपेन को लेकर सरकार ने कुछ फैसले लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा की घोषणा की। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षा और टेलिमेडिसिन सुविधाएं भी दी जाएंगी। इस सुविधा का इस्तेमाल गरीब अपना बैंक अकाउंट ऑपरेट करने के लिए भी कर सकते हैं।

मोदी सरकार ने देश भर में 100 स्मार्ट सिटी बनाने का फैसला किया है। सरकार ने ऐसे शहरों में आधुनिक तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास कर ऐसे इलाके का सपना बुना है, जहां रोजगार, आवास, पर्यावरण और जीवन से जुड़ी सुविधाएं व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हों। सरकार ने 100 स्मार्ट सिटीज की स्थापना के लिए बजट में 7060 करोड़ रुपए के फंड का एलान किया है।

मोदी सरकार ने जन धन योजना की शुरुआत ही। इसके तहत हर गरीब परिवार के लिए एक बैंक अकाउंट खोलने, 5000 रुपए की ओवरड्राफ्ट की सुविधा और एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया है।

एनडीए सरकार ने रक्षा और रेलवे में विदेशी निवेश को 49 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की थी कि रेलवे के कुछ परियोजनाओं के लिए 100 फीसदी तक विदेशी निवेश को इजाजत दी जाएगी जबकि रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत विदेशी निवेश का स्वागत किया था।

मोदी ने कहा कि देश को योजना आयोग जैसी संस्था की जरूरत नहीं है। देश के लिए पांच वर्षीय योजना बनाने वाला योजना आयोग प्लान और फंड बांटने के लिए केंद्र सरकार और राज्यों पर निर्भर रहता था। मोदी सरकार ने अपने पहले ही बजट में बुलेट ट्रेन की घोषणा की। हाई-स्पीड टेन मुंबई-अमदाबाद के बीच शुरू की जाएगी। इसके अलावा मेट्रो शहरों में हाई-सीपड ट्रेन नेटवर्क बिछाया जाएगा।

नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार को सबसे ज्यादा महंगाई को लेकर घेरा और अपने चुनाव प्रचार के दौरान जनता को महंगाई से राहत दिलाने का वादा किया था, इतना ही नहीं भाजपा अपने घोषणा पत्र में महंगाई के मुद्दे को सबसे ऊपर रखा लेकिन सरकार बनने के बाद महंगाई रोकने में मोदी सरकार विफल साबित हो रही है। इससे अलावे महिला सुरक्षा और रोजगार इस सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

सबसे ज्यादा महंगाई सब्जियों में दहाई अंक में बढ़ी 8.8% महंगाई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) की दर जनवरी 2014 में थी। जो जून तक नीचे आई, लेकिन जुलाई में तेजी से बढ़कर यह 7.5 से 7.96% पहुंच गई। अर्थव्यवस्था के एक्सपर्ट का कहना है कि देश में महंगाई अनाज की कमी से नहीं है बल्कि यह वायदा सौदों और भंडारण की अपर्याप्त व्यवस्था की वजह से है। जिसके चलते अनाज और खाने-पीने के सामानों की कीमत में भारी उतार चढ़ाव होता है।

वैसे तो किसी भी सरकार के कामों का मूल्यांकन करने के लिए 100 दिन नाकाफी है। लेकिन जनता को फौरी राहत पहुंचाने के लिए एक दिन भी काफी है। क्योंकि जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार को वह सारे फैसले लेने के अधिकार होते हैं जो जनहित के हों। इसलिए मोदी सरकार को बुलेट ट्रेन चलाने से पहले पैसेंजर ट्रेन को दुरूस्त करना चाहिए। देश के प्रत्येक नागरिक को दो वक्त की रोटी नसीब हो उस पर काम करना चाहिए। सबको मुफ्त बेहतर चिकित्सा का समान अवसर मिले इस पर तुरंत काम करना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार ने फौरी राहत पर न ध्यान देते हुए बड़े फैसले लिए, जो हकीकत में कब तब्दील होगा यह वक्त ही बताएगा।

 Swearing-in ceremony of NDA government

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