“ दूरदर्शन स्थापना के पचपनवे साल में।“ रीना ओझा भागलपुर

“ दूरदर्शन स्थापना के पचपनवे साल में।“ रीना ओझा भागलपुर

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आज ही के दिन देश के राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन की पहली आवाज़ सुनाई दी थी, 15 सितंबर, 1959 में दिल्ली से इसका प्रसारण चार घंटों के लिए हुआ था उस समय इसका उद्देश्य जनता को आवश्यक जानकारी देना था। चित्रों के साथ जानकारी देने का ये कदम एक अजूबा सा था। उस समय दूरदर्शन के मुख्य कार्यक्रम थे “ समाचार ” ग्रामीणों के लिए ” कृषि दर्शन“ और फिल्मी गानों का कार्यक्रम चित्रहार, हर रविवार को धार्मिक धारावाहिक रामायण का प्रसारण किया जाता था। 1982 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के लालकिले से भाषण का राष्ट्रीय प्रसारण हुआ जिसे पूरे देश में एक साथ देखा गया इसी वर्ष एशियाई खेलों के प्रसारण के
साथ भारत में रंगीन टीवी का प्रसारण आरंभ हुआ। दूरदर्शनकी धूम के बीच देश में विदेशी चैनलों ने पाॅव पसारने शुरुकर दिये जिसमें स्टार टीवी, जी टीवी, और सोनी प्रमुख थे।
आरंभ में ये विदेशी चैनल अपने कार्यक्रम सिंगापुर से प्रसारित करते थे जिस पर भारत सरकार का कोई नियंत्रण नही था। वर्ष 1991 में इराक युद्ध के समय अमेरिकी चैनल सीएनएन ने युद्ध की घटनाओं का उपग्रह द्वारा सीधाप्रसारण करके समाचारों की दुनिया में हलचल मचा दी थी।इस घटना के बाद अनेक विदेशी चैनल समाचार की दुनिया में दस्तक दिए। विदेशी चैनल आरंभ में अपने कार्यक्रम अंग्रेजी में दिखाते थे लेकिन जल्द ही वे समझ गए कि यदि भारत में टिकना है तो स्थानीय भाषाओं को अपनाना होगा।
इसके बाद सभी चैनलों ने हिंदी भाषा में अपने प्रसारण आरंभ किए। 1991 के दशक में भारत ने अंतरिक्ष में अपने सैटेलाइट स्थापित करके निजी चैनलों को भी भारत से प्रसारण करने की आज्ञा दी।  टीवी और मनोरंजन: पहले – पहले टीवी केवल समाचार प्राप्त करने का एक माध्यम था किंतु शीघ्र ही यह मनोरंजन का एक साधन बन गया।
जब दूरदर्शन ने बुनियाद और हम लोग नामक धारावाहिकों का प्रसारण किया था। ये दोनों धारावाहिक दूरदर्शन के इतिहास में मील का पत्थर बने और उसके बाद धार्मिक धारावाहिक रामायण और महाभारत ने तो टीवी की लोकप्रियता को इतना बढ़ा दिया कि इसने रेडियो को बहुत पीछे छोड़ दिया और आज आलम ये है कि घर – घर टीवी के सीरियलकी चर्चा होती है। दूरदर्शन पर प्रसारित एक अन्य कार्यक्रम भारत एक खोज बहुत लोकप्रिय रहा जो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु द्वारा लिखित डिस्कवरी आॅफ इंडिया पर आधारित था। दर्शकों को आकर्षित करने के लिये टीवी चैनलों ने हर प्रकार का हथकंडाअपनाया, कहानियों को बिना किसी मतलब केलंबा किया गया और दर्शकों की मांग पर कहानी को तोड़ मोड़ कर पेश किया गया। बच्चों के मनोरंजन के नाम पर अंग्रेजी़ में कार्टून चैनल काप्रसारण आरंभ हुआ और इसके साथ ही कई चैनल केवल बच्चों के लियेअपनेकार्यक्रम प्रसारित करने लगे।
 समाज पर प्रभाव – टीवी धारावाहिक के निर्माताइस बात का विशेष ध्यान रखते है कि दर्शकों की भावनाओं को किस तरह से पेश किया जाय।आपराधिक घटनाओं का नाटय रुपांतर पेश करने से छोटी उम्र के किशोर अपराध करनेलगे और अपराध की दुनिया में आ गए। बच्चोंपर कई कहानियों और धारावाहिकों का गलत प्रभाव पडा़ और सुपरमैन, शक्तिमान के नकल की कोशिश में बहुत बच्चे घायल हो गए। इसके अलावा कुछ धारावाहिकों से सामाजिक जागृति आई और सामाजिक समस्याओं को दूर करने में सहायता मिली। टीवी देखने में अधिक समय देने के कारण सामाजिकता कम होने लगी और लोग अपने घरों में ही दुबके रहने लगे। लोगो में एकता की कमी हो गई, बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने लगे, साथ ही शारीरिक श्रम कम होने के कारणलोगो की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई।किसी समय टीवी ज्ञान का माध्यम होता था, लेकिन आज ये सिर्फ बुद्धू बक्शा बनकर रह गयाहै। इसके बावजूद आज भी दूरदर्शन शिक्षा, कृषि, और हमारे सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में अपनी चमक को बरकरार रखा है। अपने स्थापना के पैसठवे साल में देश के राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन नेकई कीर्तिमान भी स्थापित किये है।

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