दवा घोटाले के दोषियों पर 48 घंटे में कार्रवाई मंत्री बिहार

दवा घोटाले के दोषियों पर 48 घंटे में कार्रवाई मंत्री बिहार

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दवा घोटाले में बीएमएसआईसीएल के एमडी प्रवीण किशोर और स्वास्थ्य विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव संजय कुमार समेत 9 लोगों को जिम्मेदार माना गया है। स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने कहा है कि दवा घोटाले के सभी दोषियों के खिलाफ सरकार 48 घंटे के अंदर कार्रवाई करेगी।
बुधवार को यहां अपने कार्यालय कक्ष में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि दोषी चाहे अधिकारी हो या दवा कंपनी, बख्शा नहीं जाएगा। यह पूछे जाने पर कि क्या 48 घंटे के अंदर उनसे शोकाज पूछा जाएगा, मंत्री ने कहा, नहीं शुक्रवार तक उन सभी पर कार्रवाई हो जाएगी।

इससे पहले स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता सह उप सचिव अनिल कुमार ने डा. केके सिंह की कमेटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए कहा कि विभाग का मानना है कि दवा खरीद में गड़बड़ी हुई है। हालांकि उन्होंने घोटाले की बात नहीं मानी। श्री कुमार ने कहा कि कमेटी ने जो रिपोर्ट दी है, उसमें इस मामले में तीन गड़बड़ियां प्रथम दृष्टया पाई गई हैं।

पहला कि दवा खरीद उन कंपनियों से हुईं जो किसी राज्य में ब्लैकलिस्टेड थीं, दूसरी की अधिक दर पर दवाओं की खरीद हुई और तीसरी कि राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा तय दर से अधिक पर दवाएं खरीदी गईं।

कुमार ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में प्राइमाफेसी में बीएमएसआईसीएल के एमडी प्रवीण किशोर और टेक्निकल इवैल्युएशन कमेटी (टीईसी) के चेयरमैन संजय कुमार (स्वास्थ्य विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव) समेत 9 अधिकारियों को इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माना गया है।

विभाग के प्रधान स्वास्थ्य सचिव दीपक कुमार द्वारा इन सभी से शोकाज पूछा जाएगा। संजय कुमार के अलावा अन्य अधिकारियों में निदेशक प्रमुख डा. सुरेन्द्र कुमार, उद्योग निदेशक ओमप्रकाश पाठक, राज्य औषधि नियंत्रक हेमंत कुमार सिन्हा, पीएमसीएच अधीक्षक के नामिनी डा. विमल कारक, राज्य स्वास्थ्य समिति में आरसीएच के अपर निदेशक डा. डीके रमन, यूएनएफबीए के प्रतिनिधि श्री हैदर और बीएमएसआईसीएल के महाप्रबंधक (वित्त और एकाउंट) त्रिपुरारी कुमार हैं जिनके दस्तखत के बाद यह टेंडर फाइनल हुआ।

वहीं टीईसी के दो सदस्य-आईजीआईएमएस के अधीक्षक और बीएमएसआईसीएल के जीएम (प्रोक्योरमेंट) दवाओं के टेंडर को लेकर हुई बैठक में मौजूद नहीं थे। श्री किशोर को बीएमएसआईसीएल के एमडी के नाते गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार माना गया है। वहीं संजय कुमार केन्द्र सरकार की सेवा में वापस लौट गए हैं।

प्रवक्ता श्री कुमार ने बताया कि वर्ष 2011 में 9वें राउंड की दवा खरीद के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई थी जो मार्च 2014 तक के लिए वैध थी। यह प्रक्रिया दिसम्बर 2013 में पूरी हुई और 52 दवाओं के लिए कंपनियों को सप्लाई आर्डर गया। जनवरी, 2104 से अगस्त 2014 तक कुल 60.63 करोड़ की दवा की खरीद हुई।

जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि 60.63 करोड़ में 14.48 करोड़ की दवा की खरीद अधिक कीमत पर हुई। वहीं तीन ब्लैकलिस्टेड कंपनियों में लेबोरेट फार्मा से 11.24 करोड़ और मेडिपोल फार्मा से 8.36 करोड़ की दवा खरीदी गई। वहीं तीसरी कंपनी ओमेगा बायोटेक से कोई दवा खरीद नहीं हुई।

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