झरखंड में दो नावों पर सवार कांग्रेस

झरखंड में दो नावों पर सवार कांग्रेस

रांची, गंठबंधन के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस दो नावों पर सवार है। एक ओर झामुमो तथा राजद के साथ मिलकर कांग्रेस राज्य में सरकार चला रही है। दूसरी ओर झाविमो के साथ गंठबंधन कर विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में भी जुटी हुई है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की जबरदस्त सफलता कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल सहित अन्य सभी क्षेत्रीय और छोटे दलों की नींद उडा दी है। अब सभी दल भाजपा के खिलाफ एकजुटता की बात कर रहे हैं। राज्य में महागंठबंधन की बात इन दलों की घबराहट को उजागर कर रहा है। झाविमो के नेता माने या नहीं पर सच तो यह है कि भाजपा में शामिल होने की नेताओं में लगी होड का सबसे ज्यादा नुकसान उसे ही हुआ है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में गंठबंधन उसकी मजबूरी बनती जा रही है। इसलिए विधानसभा चुनाव में उसने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लडा था और 11 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस गंठबंधन के कारण कांग्रेस को भी 14 सीट मिले थे। चुनाव से पहले कांग्रेस और झाविमो की बढती नजदिकियां ये संकेत दे रहीं हैं कि दोनों की पुरानी दोस्ती एक बार फिर आकार ले सकती हैं।

राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि दोनों दलों में दोस्ती कायम होती है तो झामुमो का कांग्रेस से दूर जाना स्वभाविक है। झामुमो पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सैध्दांतिक और वैचारिक स्तर पर झाविमो और झामुमो की सोच अलग है। ऐसे में दोनों के बीच गंठबंधन संभव नहीं है। फिर भी कांग्रेस के नेता झामुमो और झाविमो दोनों के साथ तालमेल के प्रयास में जुटे हुए हैं। कांग्रेस के ही कुछ नेता यह मानते हैं कि विभिन्न स्तरों पर चल रही बातचीत से नेता गंठबंधन के मसले को इतना उलझा देगा कि केंद्रीय नेतृत्व आजिज आकर गंठबंधन का मसला इन्हीं नेताओं के हवाले कर देगा। ऐसी स्थिति में गंठबंधन को लेकर दो नावों पर सवार कांग्रेस कहां तक संतुलन बनाऐ रख पायेगी यह तो आने वाला समय बतायेगा लेकिन एक बात तय है कि जरा सी भी चूकी तो वह खुद भंवर में फंस सकती है।

 

S.Bhagat

You must be logged in to post a comment Login