चीन की सीमा पर तैनात की जा रहीं आकाश मिसाइलें,

चीन की सीमा पर तैनात की जा रहीं आकाश मिसाइलें,

नई दिल्ली. चीन की ओर से लगातार हो रहे सीमा के उल्लंघनऔर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नजदीक अपनी सैन्य ताकत बढ़ाए जाने से भारत चौकन्ना हो गया है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारत ने भी अपनी ताकत बढ़ाने और आधुनिक हथियारों की तैनाती का सिलसिला तेज कर दिया है। इसके तहतमोदी सरकार देश के पूर्वोत्तर इलाके में जमीन से हवा में मार करने वाली छह आकाश मिसाइलें तैनात की जा रही हैं। इस बीच, सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू शनिवार को लद्दाख का दौरा करेंगे।

आकाश मिसाइल के जरिए भारत चीन के लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टर और ड्रोन से होने वाले हमलों का जवाब दे सकता है। इससे पहले भारतीय वायुसेना ने तेजपुर और चबुआ में सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान तैनात किए थे। चीन से सटी 4,057 किलोमीटर लंबी सीमा पर चीन की हरकतों से निपटने के लिए भारत पनी सैन्य ताकत बढ़ाने की योजना पर अमल कर रहा है। सुखोई विमान और आकाश मिसाइल की तैनाती उसी योजना का हिस्सा है।
चीन से निपटने की तैयारी 
चीन को ध्यान में रखकर सरकार अपनी फौजी ताकत मजबूत करने में जुटी हुई है। इसके तहत 5,000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-5 इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का विकास किया जा रहा है। इस मिसाइल के बूते चीन से सटी भारत की सीमा से चीन के किसी भी हिस्से पर हमला किया जा सकेगा। यही नहीं, जमीन पर किसी भी तरह की चीनी हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय सेना 64,678 करोड़ रुपए खर्च कर माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स का भी विकास कर रही है। इसमें 90 हजार सैनिक शामिल होंगे। इस कॉर्प्स की तैनाती 2018-2019 तक होने की उम्मीद है। चीन की सीमा से सटे इलाकों में सेना से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 26,155 करोड़ रुपए की योजना पर भी काम चल रहा है।
भारतीय एयरफोर्स भी बढ़ा रही ताकत  
भारतीय वायुसेना ने चीन की सीमा के नजदीक तेजपुर और चबुआ के अलावा बरेली में भी सुखोई विमान की तैनाती की है। वायुसेना ने लद्दाख के न्योमा और दौलत बेग ओल्डी में विमानों और हेलिकॉप्टरों को लैंड कराने के लिए एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) का विकास किया गया है। भारत-चीन-म्यांमार की सीमा पर मौजूद विजयनगर में भी एएलजी का विकास किया गया है। इसी तरह के एएलजी का विकास पूर्वोत्तर के पासीघाट, मेचुका, वेलॉन्ग, टूटिंग और जीरो जैसे इलाकों में किया जा रहा है।
चीन की कूव्वत 
भारत ने अपनी फौजी तैयारियां इसलिए तेज की है, क्योंकि एलएसी पर चीन लगातार ताकत बढ़ा रहा है। चीन तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (टीएआर) और उसके उत्तरी इलाके में 8 एयरबेस से 21 फाइटर स्क्वैड्रन की बहुत कम समय में तैनाती करने की कूव्वत रखता है। यही नहीं, टीएआर में सड़क और रेल मार्ग के विकास के जरिए चीन ने दुर्गम इलाके में भारत के मुकाबले 3:1 के अनुपात में अपने सैनिक तैनात करने की क्षमता का भी विकास कर लिया है। इसके अलावा चीन जे-10, सुखोई-27यूबीके और सुखोई-30एमकेके जैसे लड़ाकू विमानों के साथ किंघई-तिब्बत पठार में सैन्य अभ्यास कर रहा है।
courtsey: danik bhaskar
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