चीनी पर इंपोर्ट ड्यूटी में 10 फीसदी का इजाफा, 1 रु तक बढ़ सकती हैं कीमतें

चीनी पर इंपोर्ट ड्यूटी में 10 फीसदी का इजाफा, 1 रु तक बढ़ सकती हैं कीमतें
शुक्रवार को केन्द्र सरकार ने रॉ शुगर पर इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी है। वहीं उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के गन्ना किसान और चीनी मिलें बकाया भुगतान को लेकर आमने-सामने है। साथ ही त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से चीनी की कीमत 50 पैसे से लेकर एक रुपए तक महंगी होने की संभावना है। हालांकि चीनी की कीमतें घरेलू और ंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई और मांग पर निर्भर रहेगी। दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13 अगस्त को उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों को अपने स्टॉक को बेच कर किसानों को पैसा देने को कहा है जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई है। साथ ही देश में चीनी का उत्पादन बढ़ने की संभावना है जिसके चलते कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क 
सरकार ने रॉ शुगर पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में 10 फीसदी का इजाफा किया है जबकि जबकि ISMA ने इंपोर्ट ड्यूटी 40 फीसदी करने की मांग की है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से शुगर कंपनियों को फायदा होगा। दरअसल विदेशी चीनी घरेलू चीनी के मुकाबले सस्ती है जिसके चलते कंपनिया आयात कर रही है। लेकिन आयात महंगा होने से अब घरेलू चीनी की मांग बढ़ेगी जिससे चीनी मिलों को फायदा मिलेगा और वह आसानी से किसानों का भुगतान अदा कर सकेंगे।
क्या है जानकारों की राय
केडिया कमोडिटी के अजय केडिया के मुताबिक चीनी की कीमतें प्रमुख उत्पादक देशों के मौसम पर निर्भर हैं। हालांकि त्यौहारी सीजन होने की वजह से मांग बढ़ेगी जिससे कीमतों में मामूली तेजी देखने को मिल सकता है। चूकिं उत्तर प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र के भी किसान और चीनी मिलों के बीच गतिरोध बढ़ रहा है। इसके कारण भी कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। अजय के अनुसार चीनी की कीमतें मध्यम अवधि में 3124 रुपए प्रति क्विंटल का स्तर दिखा सकती है।
एमके कमोडिटी की प्रेरणा शर्मा का मानना है कि चीनी दायरे में कारोबार करेगा। दरअसल बाजार में सप्लाई प्रर्याप्त है साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने का अनुमान है जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। साथ ही सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क को बढ़ा दिया है, इससे कीमतों को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। प्रेरणा शर्मा के अनुसार गिरावट पर कारोबारी खरीददारी कर सकते है।3250-3300 रुपए प्रति क्विंटल के लक्ष्य के लिए खरीददारी कर सकते है।
हेम सिक्योरिटी की आस्था जैन के मुताबिक चीनी में चालू स्तर से मामुली बढ़त देखने को मिल सकती है। अगले एक महीने तक चीनी की कीमतें 3000-3150 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर सकता है। देश में गन्ने की बुआई पिछले साल के मुकाबले कम हुई है। हालांकि इंडियन शुगर मिल असोशियसन ने उत्पादन 4 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया है।
चीनी संकट गहराने की आशंका
उत्तर प्रदेश में गन्ने की कीमत को लेकर सरकार और चीनी मिलें आमने सामने हैं। चीनी मिलों की अगले सीजन में पेराई न करने के ऐलान के तुरंत बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। सरकार ने मिलों की जब्त चीनी की नीलामी शुरु कर दी है। मिलों के रुख को देखने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि अब जब्त की गई चीनी की नीलामी करके किसानों के बकाए का भुगतान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मिलों की प्रॉपर्टी भी नीलाम की जा सकती है। गन्ना किसानों के बकाए के भुगतान के लिए भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों का आंदोलन अब और भी तेज होता जा रहा है। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब 5700 करोड़ रुपये का बकाया है।
उत्तर प्रदेश में कितनी हुई है बुआई
उत्तर प्रदेश के किसानों को पैसा न मिलने की वजह से इस साल राज्य के किसानों ने गन्ने की बुआई पिछले साल के मुकाबले 6.32फीसदी कम किया है।  देश में अबतक गन्ने की बुआई 47.1 लाख हेक्टेयर में हुई है जो कि पिछले साल 50.3 लाख हेक्टेयर में हुई थी। उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुआई 19.4 लाख हेक्टेयर मे हुई है जो कि पिछले साल 22.2 लाख हेक्टेयर में हुई थी।
शुगर मिल नहीं खरीद रही हैं गन्ना
उत्तर प्रदेश की 60 चीनी मिलों ने राज्य सरकार को काम बंद करने का नोटिस दे दिया है। गन्ने के ऊंचे भाव के चलते चीनी मिलें गन्ना लेने को तैयार नहीं हैं। चीनी कंपनियां उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये से परेशान हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों को पेराई का नोटिस भेजा था। साथ ही उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर किसानों का 2,300 करोड़ रुपये बकाया है। सरकार और मिलों के बीच तनाव से कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।3724_sugar

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