ई-लर्निंग से पूरी होगी उच्‍च शिक्षा की ख्‍वाहिश

ई-लर्निंग से पूरी होगी उच्‍च शिक्षा की ख्‍वाहिश

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शिक्षा के अधिकार को सफलता पूर्वक लागू करने के बाद आज के हालत को देखते हुए हमारे पास शायद ही इतना बडा इन्फ्रास्ट्रक्चर हो जिसकी मदद से हर इच्छुक छात्र को उसकी इच्छानुसार शिक्षा प्रदान की जा सके. ऐसे हालत में वैसे भी कॉलेज के बाहर स्तरीय शिक्षा की अनौपचारिक व्यवस्था करना सरकार की मजबूरी है और हमारे लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति का एक बेहतर विकल्प. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना की है जहां से पत्राचार के माध्यम से बेहतर शिक्षा ग्रहण की जा सकती है.

दूसरे केन्द्रीय विश्वविद्यालय और राज्य सरकारों के अन्य विश्वविद्यालय भी पत्राचार के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को उच्च शिक्षा की सुविधा प्रदान करने की चेष्‍टा कर कहे हैं. उदाहरण के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीन कार्यरत स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग का नाम लिया जा सकता है जो लाखो छात्रों को स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के दायित्व को पूरा करने की चेष्टा कर रहा है. यद्यपि इन संस्थाओं द्वारा छात्रों को पत्राचार सामग्री प्रदान की जाती है परंतु जरूरत पूरा कर सकने में यह व्यवस्था पूरी तरह सक्षम नहीं है. इ-लर्निंग द्वारा इस समस्या को एक हद तक निपटाया जा सकता है.

इसी को देखते हुए यूजीसी ने डीयू के आईएलएलएल को ई-लर्निंग का बड़े पैमाने पर पाठ्य सामग्री तैयार करने का दायित्व दिया है जिसका लाभ उठाकर आप अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं. इग्नु की वेबसाइट पर भी पाठ्य सामग्री मौजूद है, जिससे भी आपको सहायता मिल सकेगी. इसके अलावा इंटरनेट की सहायता से ज्ञान के अथाह समुद्र में कोई भी डुबकी लगा सकता है. संचार-हाईवे को माध्यम बनाकर पेशेवर अपनी ट्यूशन देने की क्षमता को ग्लोबल स्तर पर बेचने की व्यवस्था करते हैं. इसे ही इ-ट्यूशन का नाम दिया गया है. इससे कस्टमाइज्ड जानकारी बिना किसी विशेष प्रयास के प्राप्त की जा सकती है परंतु आपको इसकी अच्छी कीमत भी चुकानी पड सकती है. जाहिर है, साधन-संपन्न परिवार के बच्चों के लिए यह लाभदायक हो सकता है परंतु अगर आपके पास संसाधनों की कमी है तो भी ई-लर्निंग का विकल्प आपके पास है ही.

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