अमेरिका ने आईएसआईएस को खत्‍म करने का लिया संकल्प

अमेरिका ने आईएसआईएस को खत्‍म करने का लिया संकल्प

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वाशिंगटन : आतंकवाद रोधी अपनी समग्र रणनीति का खुलासा करते हुए अमेरिका ने गुरुवार को संकल्प लिया कि वह इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) को हवाई हमलों से नष्ट कर देगा और कहा कि अमेरिका को धमकी देने वाले आतंकवादियों को कोई ‘सुरक्षित ठिकाना नहीं’ मिलेगा।

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पूरे देश में टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में आईएसआईएस को नतीजा भुगतने की चेतावनी दी। ओबामा ने कहा कि हम समग्र और निरंतर रूप से जारी आतंकवाद रोधी रणनीति के जरिए आईएसआईएल को कम और अंतत: खत्म कर देंगे। राष्ट्रपति ने योजना के तहत कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों की रक्षा और मानवीय मिशन चलाने के अपने प्रयासों से परे भी अपने कदम को विस्तारित करेगा।

उन्होंने कहा कि हमारी हवाई ताकत का इस्तेमाल और जमीन पर मौजूद बलों की सहायता करते हुए कहीं भी मौजूद आईएसआईएल को उखाड़ फेंकने के लिए यह आतंकवाद रोधी अभियान एक दृढ़ और अनवरत प्रयास के जरिए छेड़ा जाएगा। ओबामा ने कहा कि मैं यह स्पष्ट कर चुका हूं कि हम हमारे देश को धमकी देने वाले आतंकवादियों का पीछा करेंगे चाहे वे कहीं पर भी हों। राष्ट्रपति ने कहा कि इसका मतलब यह है कि हम सीरिया और इराक में भी आईएसआईएल के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएंगे। राष्ट्रपति रहते यह मेरा मूल सिद्धांत है, यदि आप अमेरिका को धमकी देते हो तो आपको कहीं भी शरण नहीं मिलेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालांकि आईएसआईएल को शिकस्त देने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की। ओबामा ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिका नीत अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में दर्जनों देश शामिल हुए हैं। विदेश विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार आईएसआईएल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में अरब लीग के अतिरिक्त 37 देश शामिल हुए हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल नहीं होने की नीति रखने वाला भारत इसमें शामिल नहीं है।

गठबंधन में विभिन्न तरह का योगदान देने वालों में आस्ट्रेलिया, कनाडा, मिस्र, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, हंगरी, इराक, आयरलैंड, इटली, जापान, सउदी अरब, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अन्य देश शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि हम संयुक्त खतरे के खिलाफ विश्व को एकजुट कर रहे हैं और राष्ट्रपति की रणनीति सफल होगी क्योंकि सहयोगियों और साझेदारों के साथ इसे अंजाम देना प्रभावशाली और मजबूत कदम है।

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